श्री हनुमान प्रश्नावलीहाँ या नहीं में उत्तर - हनुमान ज्योतिष
- श्री राम और हनुमान जी का स्मरण कर सच्चे हृदय से प्रार्थना करें
- अपना प्रश्न मन में स्पष्ट रूप से सोचें
- नीचे चक्र में जिस अंक पर मन जाए, उसे स्पर्श करें
- नीचे अपना उत्तर पढ़ें
PDF डाउनलोड करें (चक्र और सभी 49 उत्तर)
हनुमान प्रश्नावली क्या है?
हनुमान प्रश्नावली हनुमान ज्योतिष पर आधारित प्रश्न पूछने की एक पारम्परिक विधि है। इसमें 49 अंकों का एक त्रिकोण चक्र होता है। प्रश्नकर्ता श्रद्धा से प्रश्न मन में रखकर किसी एक अंक को चुनता है, और उस अंक का वचन और उत्तर उसे मार्गदर्शन देता है। हर उत्तर के अंत में स्पष्ट लिखा है: हाँ, नहीं या प्रतीक्षा।
सभी 49 उत्तर
- जय सियाराम, जय जय सियाराम।
आपकी मनोकामना पूर्ण होगी। धैर्य रखें और अपने मार्ग पर श्रद्धा से बने रहें। (हाँ) - राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरीं द्वार।
कुछ बाधाओं के बाद सफलता मिलेगी। ईश्वर के समय पर विश्वास रखें। (हाँ) - होइहि सोइ जो राम रचि राखा।
आपके जीवन में शुभ परिवर्तन आने वाला है। उसका खुले मन से स्वागत करें। (हाँ) - कवन सो काज कठिन जग माहीं।
वर्तमान स्थिति धीरे-धीरे सुधरेगी। ईश्वर की योजना पर भरोसा रखें। (हाँ) - राम काज करिबे को आतुर।
विलम्ब हो सकता है, पर निरंतर प्रयास से सफलता निश्चित है। (हाँ) - नाथ सकल मुद मंगल दाता।
शीघ्र ही शुभ समाचार मिलेगा। सकारात्मक रहें और श्रद्धा बनाए रखें। (हाँ) - भूत पिशाच निकट नहिं आवे।
ईश्वरीय रक्षा से शत्रुओं और बाधाओं पर विजय निश्चित है। (हाँ) - प्रबिसि नगर कीजे सब काजा।
आत्मविश्वास से कार्य आरम्भ करें, सफलता निश्चित है। (हाँ) - भय प्रगट कृपाला दीनदयाला।
आपकी चिंताएँ दूर होंगी, ईश्वर की कृपा आपके साथ है। (हाँ) - संकट कटै मिटै सब पीरा।
कष्ट समाप्त होंगे, अच्छा समय आ रहा है। (हाँ) - तुलसीदास सदा हरि चेरा।
निष्ठा और श्रद्धा से शुभ परिणाम मिलेंगे। (हाँ) - जो सत बार पाठ कर कोई।
भक्तिभाव से किया जाए तो सफलता निश्चित है। (हाँ) - नहिं दरिद्र कोई दुखी न दीना।
वर्तमान परिस्थितियाँ अनुकूल नहीं हैं, प्रतीक्षा करें। (नहीं) - इहां न कछु मोह माया न व्यापा।
आगे बढ़ने से पहले मोह का त्याग आवश्यक है। (नहीं) - जथा लाभ संतोष सदा मन।
धैर्य रखें, अभी उचित समय नहीं आया है। (नहीं) - प्रभु की कृपा भयउ सब काजू।
ईश्वर की कृपा से सफलता सुनिश्चित है। (हाँ) - भृगु पद गहि हृदयँ धरि धीर।
धैर्य और साहस रखें, सफलता आ रही है। (हाँ) - मोर मनोरथ जानि हरषाई।
आपकी इच्छाएँ शीघ्र पूर्ण होंगी। (हाँ) - तब जनक पायस देवन जाई।
आंशिक सफलता, सावधानी से आगे बढ़ें। (प्रतीक्षा) - विनय करउँ कर जोरि मनावउँ।
सफलता से पहले और प्रयास आवश्यक है। (नहीं) - संकट मोचन नाम तिहारो।
हनुमान जी आपकी बाधाएँ दूर करेंगे। (हाँ) - जय जय जय हनुमान गोसाई।
स्पष्ट हाँ! शुभ संकेत हैं। (हाँ) - गइ अकाजु बिप्र गहि पाँए।
अभी यह कदम न उठाएँ, समय उपयुक्त नहीं है। (नहीं) - हनुमत कृपा पाई हनुमान।
आप पर ईश्वर की रक्षा है। (हाँ) - भवसागर बिनु भजन न तरे।
आगे बढ़ने से पहले प्रार्थना और भजन पर ध्यान दें। (नहीं) - रामकथा सुन्दर कर गाई।
आध्यात्मिक उन्नति के साथ शुभ परिणाम मिलेंगे। (हाँ) - त्राहि त्राहि अरुनासुर गावै।
सावधान! आगे बाधाएँ हैं। (नहीं) - रघुकुल रीति सदा चलि आई।
धर्म के मार्ग पर बने रहें, सफलता निकट है। (हाँ) - हनुमान लंका में प्रगटे।
साहस से बाधाओं पर विजय पाएँ। (हाँ) - सिया राममय सब जग जानी।
सब कुछ ईश्वर की इच्छा के अधीन है। सफलता निकट है। (हाँ) - रामहि केवल प्रेमु पियारा।
भक्ति और प्रेम से मनोकामना पूर्ण होगी। (हाँ) - जासु कृपा नहिं कृपा कराही।
सफलता के लिए आपके प्रयासों को ईश्वर की कृपा चाहिए। (नहीं) - बिनु सत्संग विवेक न होई।
निर्णय से पहले सज्जनों की संगति और सलाह लें। (प्रतीक्षा) - सोइ जानहि जेहि देहु जनाई।
उचित समय पर सत्य प्रकट होगा। (प्रतीक्षा) - नहिं दरिद्र कोई दुखी न दीना।
शीघ्र ही आर्थिक और मानसिक स्थिरता आएगी। (हाँ) - जथालाभ संतोष सदा मन।
जो मिला है उसमें संतोष रखें, और भी मिलेगा। (हाँ) - जो प्रभु दीनदयाल कहावा।
आपकी प्रार्थना शीघ्र स्वीकार होगी। (हाँ) - जय जय जय धुनि होई।
विजय और सफलता निश्चित है। (हाँ) - संतन को करि बिपति सहाई।
ईश्वरीय कृपा से कठिनाइयाँ दूर होंगी। (हाँ) - राम बिनु के करै सहाय।
सफलता के लिए ईश्वर की सहायता पर भरोसा रखें। (हाँ) - बिनु सत्संग विवेक न होई।
निर्णय से पहले विद्वानों और अनुभवी लोगों से मार्गदर्शन लें। (प्रतीक्षा) - पवन तनय बल पवन समाना।
शक्ति और ऊर्जा आपके पक्ष में हैं। आगे बढ़ें। (हाँ) - धीरज धरहु संग साहस।
धैर्य और साहस से विजय मिलेगी। (हाँ) - अब कि कृपा राम करि होई।
परिस्थितियों में शुभ मोड़ निकट है। (हाँ) - हनुमान लंका में प्रगटे।
साहस से बाधाओं पर विजय पाएँ। (हाँ) - रघुकुल रीति सदा चलि आई।
धर्म का पालन करें, सफलता मिलेगी। (हाँ) - शरणागत कहुं कृपा सागर।
आप ईश्वर की रक्षा में हैं। आगे बढ़ें। (हाँ) - रामकथा सुन्दर कर गाई।
भक्ति और सच्चाई से सफलता मिलेगी। (हाँ) - भवसागर बिनु भजन न तरे।
सफलता से पहले साधना और भक्ति आवश्यक है। (नहीं)
प्रश्नावली के नियम
- एक समय में एक ही प्रश्न पूछें।
- एक ही प्रश्न को बार-बार न पूछें।
- दिन में तीन से अधिक प्रश्न न पूछें।
- उत्तर को श्रद्धा से पढ़ें और उस पर विचार करें। महत्वपूर्ण निर्णयों में अपने विवेक का भी उपयोग करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या हनुमान प्रश्नावली निःशुल्क है?
हाँ। यह पूरी तरह निःशुल्क है, न कोई पंजीकरण, न कोई लॉगिन।
क्या उत्तर हाँ या नहीं में मिलता है?
हाँ। 49 उत्तरों में से हर उत्तर के अंत में हाँ, नहीं या प्रतीक्षा लिखा है।
हनुमान प्रश्नावली में कितने अंक हैं?
49 अंक हैं, जो एक त्रिकोण चक्र में व्यवस्थित हैं। हर अंक का अपना वचन और उत्तर है।
क्या एक ही प्रश्न दोबारा पूछ सकते हैं?
परम्परा के अनुसार एक ही प्रश्न उसी दिन दोबारा नहीं पूछना चाहिए।
क्या यह उत्तर सत्य होते हैं?
प्रश्नावली एक भक्ति-साधना है। भक्त श्रद्धा से उत्तर पढ़ते हैं और उसमें मार्गदर्शन पाते हैं। यह किसी परिणाम की गारंटी नहीं है।
प्रश्नावली एक भक्ति-साधना है। महत्वपूर्ण निर्णयों में अपने विवेक का उपयोग करें और योग्य सलाह लें। गोपनीयता नीति (Privacy Policy)।