श्री राम शलाका प्रश्नावलीश्री रामचरितमानस प्रश्नावली - दिव्य मार्गदर्शन
- श्री राम का स्मरण कर सच्चे हृदय से प्रार्थना करें
- अपना प्रश्न मन में स्पष्ट रूप से सोचें
- नीचे चक्र में जिस अक्षर पर मन जाए, उसे स्पर्श करें
- नीचे अपना उत्तर पढ़ें
| सु | प्र | उ | बि | हो | मु | ग | ब | सु | नु | बि | घ | धि | इ | द |
| र | रु | फ | सि | सि | रें | बस | है | मं | ल | न | ल | य | न | अं |
| सुज | सो | ग | सु | कु | मम | स | ग | त | न | ई | ल | धा | बे | नो |
| त्य | र | न | कु | जो | म | रि | र | र | अ | की | हो | सं | रा | य |
| पु | सु | थ | सी | जे | इ | ग | म | सं | क | रे | हो | स | स | नि |
| त | र | त | र | स | इ | ह | ब | ब | प | चि | स | य | स | तु |
| म | का | ा | र | र | मा | मि | मी | म्हा | ा | जा | हू | हीं | ा | जू |
| ता | रा | रे | री | हृ | का | फ | खा | जि | ई | र | रा | पू | द | ल |
| नि | को | मि | गो | न | मु | जि | य | ने | मनि | क | ज | प | स | ल |
| हि | रा | म | स | रि | ग | द | न | ष | म | खि | जि | मनि | त | जं |
| सिं | मु | न | न | कौ | मि | निज | र | ग | धु | ख | सु | का | स | र |
| गु | क | म | अ | ध | नि | म | ल | ा | न | ब | ती | न | रि | भ |
| ना | पु | व | अ | ढा | र | त | का | ए | तु | र | न | नु | व | थ |
| सि | ह | सु | म्ह | रा | र | स | हिं | र | त | न | ष | ा | ज | ा |
| र | सा | ा | ला | धी | ा | री | जा | हू | हीं | षा | जू | ई | रा | रे |
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राम शलाका प्रश्नावली क्या है?
राम शलाका प्रश्नावली श्री रामचरितमानस पर आधारित प्रश्न पूछने की एक पारम्परिक विधि है। इसमें 15 पंक्तियों और 15 स्तम्भों का एक चक्र होता है, जिसमें 225 अक्षर हैं। ये अक्षर गोस्वामी तुलसीदास जी की रामचरितमानस की नौ चौपाइयों से बने हैं। प्रश्नकर्ता श्रद्धा से प्रश्न मन में रखकर किसी एक अक्षर को चुनता है, और वह अक्षर जिस चौपाई का है, वही चौपाई उसका उत्तर मानी जाती है।
राम शलाका प्रश्नावली रामचरितमानस के अनेक संस्करणों में छपी मिलती है और इसे सबसे प्राचीन और प्रामाणिक प्रश्नावली माना जाता है।
नौ चौपाइयाँ और उनके उत्तर
- सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजहि मन कामना तुम्हारी॥
यह चौपाई बालकाण्ड की है। सीता जी की गौरी पूजा के प्रसंग में माता गौरी सीता जी को आशीर्वाद देती हैं।
प्रश्न उत्तम है। कार्य सिद्ध होगा। - प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदय राखि कोसलपुर राजा॥
यह चौपाई सुन्दरकाण्ड की है, जब हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं।
भगवान का स्मरण करके कार्य आरम्भ करें। सफलता मिलेगी। - उघरें अंत न होइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू॥
यह चौपाई बालकाण्ड के आरम्भ में सत्संग के प्रसंग की है।
यह कार्य लाभदायक नहीं है। इसकी सिद्धि में संदेह है। - बिधि बस सुजन कुसंगत परहीं। फनि मनि सम निज गुन अनुसरहीं॥
यह चौपाई बालकाण्ड के आरम्भ की है, जिसमें सत्संग और कुसंग के प्रभाव का वर्णन है।
दुष्टों की संगति से बचें। कार्य की सिद्धि में संदेह है। - होइहै सोई जो राम रचि राखा। को करि तरक बढ़ावहिं साखा॥
यह चौपाई अयोध्याकाण्ड की है, जो भरत जी ने कही है।
जो श्री राम ने रच रखा है, वही होगा। चिंता न करें। - मुद मंगलमय संत समाजू। जिमि जग जंगम तीरथ राजू॥
यह चौपाई बालकाण्ड की है, जिसमें संत समाज को चलता-फिरता तीर्थराज कहा गया है।
प्रश्न श्रेष्ठ है। कार्य सफल होगा। - गरल सुधा रिपु करय मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई॥
यह चौपाई सुन्दरकाण्ड की है, हनुमान जी के लंका प्रवेश के प्रसंग की।
प्रश्न अत्यंत शुभ है। कार्य में सफलता मिलेगी। - बरुन कुबेर सुरेस समीरा। रन सनमुख धरि काह न धीरा॥
यह चौपाई लंकाकाण्ड की है, रावण-वध के बाद मंदोदरी के विलाप की।
कार्य की सिद्धि में संदेह है। - सुफल मनोरथ होहुँ तुम्हारे। रामु लखनु सुनि भए सुखारे॥
यह चौपाई बालकाण्ड की है, जब पुष्पवाटिका से फूल लाने पर विश्वामित्र जी आशीर्वाद देते हैं।
प्रश्न अति उत्तम है। मनोरथ सफल होगा।
प्रश्नावली के नियम
- एक समय में एक ही प्रश्न पूछें।
- एक ही प्रश्न को बार-बार न पूछें।
- दिन में तीन से अधिक प्रश्न न पूछें।
- उत्तर को श्रद्धा से पढ़ें और उस पर विचार करें। महत्वपूर्ण निर्णयों में अपने विवेक का भी उपयोग करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या राम शलाका प्रश्नावली निःशुल्क है?
हाँ। यह पूरी तरह निःशुल्क है, न कोई पंजीकरण, न कोई लॉगिन।
राम शलाका प्रश्नावली में कितनी चौपाइयाँ हैं?
नौ चौपाइयाँ हैं। 225 अक्षरों का चक्र इन्हीं नौ चौपाइयों से बना है, और हर अक्षर किसी एक चौपाई का है।
क्या उत्तर हाँ या नहीं में मिलता है?
राम शलाका का उत्तर चौपाई के फल के रूप में मिलता है, जो बताता है कि कार्य सिद्ध होगा या उसमें संदेह है। सीधे हाँ या नहीं के लिए हनुमान प्रश्नावली देखें।
क्या एक ही प्रश्न दोबारा पूछ सकते हैं?
परम्परा के अनुसार एक ही प्रश्न उसी दिन दोबारा नहीं पूछना चाहिए।
क्या यह उत्तर सत्य होते हैं?
प्रश्नावली एक भक्ति-साधना है। भक्त श्रद्धा से उत्तर पढ़ते हैं और उसमें मार्गदर्शन पाते हैं। यह किसी परिणाम की गारंटी नहीं है।
प्रश्नावली एक भक्ति-साधना है। महत्वपूर्ण निर्णयों में अपने विवेक का उपयोग करें और योग्य सलाह लें। गोपनीयता नीति (Privacy Policy)।